औरत ने जन्म दिया मर्दों को,मर्दों ने उसे बाजार दिया।। तुलती है कहीं दीनारों मे,बिकती है कहीं बाजारों मे,नंगी नचवाई जाती है,हैवानों के दरवारों मे,ये वो बेइज्जत चीज है,जो बिक जाती है इज्जतदारो मे,मर्दों के लिए हर जुल्म छोटा ,औरतों के लिए रोना भी खता,मर्दों के लिए हर ऐश का हक,औरत के लिए जीना भीContinue reading “औरत ने जन्म दिया मर्दों को!”